ज्‍योतिष सीखना अब है आसान



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ज्‍योतिष और हस्‍तरेखा विज्ञान ऐसे विषय हैं जिन्‍हें जानने वाले व्‍यक्ति के प्रति आम जनता का सहज आकर्षण रहता है चाहे आप इसे शौकिया तौर पर अपनायें या व्‍यवसायिक रूप में। आजकल जहां इन विषयों पर अधिकार का दावा करने वाले आपकी हर समस्‍या के समाधान का दावा करते हैं वही जनता का एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जिसे बेवकूफ बनाकर पैसे ऐंठने वाले ढोंगियों की संख्‍या भी कम नहीं है। जैसे चिकित्‍सा क्षेत्र की थोड़ी बहुत जानकारी लेकर बहुत से झोलाछाप डॉक्‍टर अपनी दुकान खोले बैठे हैं वैसे ही यहां भी ऐसे झोलाछापों की कमी नहीं है। फिर भी चूंकि आजकल इसका बाजार बहुत बड़ा है और इस भीड़ में कौन विशेषज्ञ है और कौन नकली ये पता करना भी आसान नहीं खासकर टीवी और इंटरनेट के दौर में इसलिए सभी की दुकान थोड़ी हो या बहुत चल ही रही है। इस प्रोफेशन में ज्ञान ही पूंजी है इसलिए जो धैर्यपूर्वक निरंतर अध्‍ययन के साथ-साथ इस काम में लगे हैं वे ही अधिक तरक्‍की कर पाते हैं तो किसी भी पेशे की तरह अपने ज्ञान को इस पेशे में भी परिष्‍कृत करते रहना चाहिए। यदि केवल बिजनेस के नजरिये से ही इसे देखा जाए तो भी ये एक ऐसी इंटस्‍ट्री है जहां डिमांड बहुत ज्‍यादा है तो इसमें रुचि रखने वाले इसके बारे में सीखकर और समय के साथ अपनी जानकारी बढ़ाकर इसे एक Full Time या Part Time Self Employment Business के तौर पर इसे शुरू कर सकते हैं। 

सवाल ये है कि भविष्‍यफल बताने, कुंडली बनाने, विवाह कुंडलीमिलान जैसे विषयों को सीखने का सही तरीका क्‍या है। बहुत सारे विश्‍वविद्यालय भी आजकल एस्‍ट्रोलॉजी में कोर्स चला रहे हैं। हालांकि इस व्‍यवसाय को करने के लिए किसी डिग्री या योग्‍यता की जरूरत नहीं है ना ही इसके बारे में सरकार के कोई नियम आदि ही हैं। बहुत सारे लोग हैं जो इसे सीखना तो चाहते हैं पर समय या संसाधनों की कमी के कारण किसी पाठ्यक्रम आदि में दाखिला नहीं ले सकते ना ही वे सब जगह उपलब्‍ध हैं। उनके लिए विकल्‍प है कि उन्‍हें इस विषय पर उपलब्‍ध किताबों का अध्‍ययन करना चाहिए। पर प्रश्‍न यह कि कि एकदम शुरूआती स्‍तर पर इसके अध्‍ययन के लिए क्‍या पढ़ना चाहिए वरना यह विषय इतना जटिल है कि इस विषय पर लिखी किताबों और उनकी भाषा को पढ़कर कुछ पल्‍ले पड़ता नहीं व नये सीखने वाले को इस विषय से ही अरुचि हो जाती है और वह पढ़ना ही छोड़ देता है।

अभी अभी एक किताब हाथ में आई जो इस समस्‍या का समाधान करती है। ये एक बेसिक बुक है इस विषय को सिखाने वाली ठीक उस तरह जैसे हम अंग्रेजी सीखने के लिए एबीसीडी से शुरूआत करें। इस पुस्‍तक का नाम है – ‘आओ ज्‍योतिष सीखें – ज्‍योतिष सीखने की प्रथम पुस्‍तक’ नाम से ही स्‍पष्‍ट हो रहा है कि ये किस उद्देश्‍य को ध्‍यान में रखकर लिखी गई है। इसके लेखक हैं तिलक चन्‍द ‘तिलक’ जो काफी समय से शौकिया तौर पर इस विषय के गहन अध्‍ययन में और इससे संबंधित लेखन में लगे हुए हैं।

ये पुस्‍तक यह कतई दावा नहीं करती कि इसे पढ़कर आप को ज्‍योतिष जैसे गूढ़ विषय पर अधिकार प्राप्‍त हो जाएगा। हां आप खुद को ज्‍योतिषी बताकर दुकान चलाने वाले किसी ऐरे गैरे व्‍यक्ति की तुलना में खुद को बेहतर स्थिति में पायेंगे और केवल 5 मिनट में कुंडली बनाने की योग्‍यता आप प्राप्‍त कर लेंगे। इसलिए इस पुस्‍तक को ज्‍योतिषी बनने के लिए पहली सीढ़ी के तौर पर देखें। यदि आप पहली सीढ़ी ठीक से चढ़ लेंगे तो आगे की चढ़ाई आसान हो जाएगी। इस पुस्‍तक की विशेषता है इसकी सरल भाषा और विषय को रुचिकर ढंग से पेश करने की शैली जो किसी के भी समझ में आसानी से आ सकती है । इस पुस्‍तक में आप कुछ बेहद शुरूआाती स्‍तर के प्रश्‍नों का समाधान पा सकते हैं जिनमें प्रमुख हैं- जन्‍म कुंडली क्‍या है और इसका क्‍या महत्‍व है, इसके बारह भाव एवं प्रकार, अपनी जन्‍म राशि कैसे जानें और इसे बनाने की विधि, ग्रहों की स्थिति जन्‍म नक्षत्र से राशिफल जानना और भविष्‍यफल बताने की विधि। यदि आप इन प्रश्‍नों में से किसी का भी उत्‍तर जानना चाहते हैं तो आपके लिए ये किताब पढ़ने लायक है और सबसे बड़ी बात कि इसे पढ़कर आपकी इस विषय में दिलचस्‍पी और बढ़ जायेगी।

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